सरपंच प्रतिनिधि और उपसरपंच प्रतिनिधि पर पुराने पंचायत भवन को बेचने का आरोप,
ग्रामसभा में खरीदार ने सार्वजनिक रूप से सौदे की कही बात ग्रामीणों ने तत्काल खाली कराने और मामले की जांच की उठाई मांग
शेख मुबारक @ पृथक छत्तीसगढ़ /सक्ती।
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत किकिरदा में पुराने पंचायत भवन की कथित बिक्री का मामला सामने आने के बाद पंचायत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और पंचों का आरोप है कि वर्तमान सरपंच प्रतिनिधि और उपसरपंच प्रतिनिधि ने मिलकर पुराने पंचायत भवन का करीब 3 लाख 30 हजार रुपए में सौदा कर दिया। हैरानी की बात यह है कि कथित खरीदार पिछले लगभग दो वर्षों से पंचायत भवन में अपने परिवार के साथ रह रहा है, जबकि भवन शासकीय संपत्ति है।
जानकारी के अनुसार, 31 जुलाई को मवेशियों की व्यवस्था को लेकर आयोजित ग्रामसभा के दौरान यह मामला खुलकर सामने आया। ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत भवन में रह रहे व्यक्ति ने ग्रामसभा में सभी के सामने स्वीकार किया कि उसने भवन वर्तमान सरपंच प्रतिनिधि बूंद राम चंद्रा और उपसरपंच प्रतिनिधि अशोक कुमार देवांगन से 3.30 लाख रुपए में खरीदा है। उसने यह भी कहा कि 20 रुपये के स्टांप पर बिक्रीनामा तैयार करने की बात हुई थी, लेकिन आज तक कोई विधिवत दस्तावेज तैयार नहीं किया गया, इसलिए वह भवन खाली नहीं करेगा।
मामले के सार्वजनिक होने के बाद ग्रामसभा में मौजूद पंचों और ग्रामीणों ने एकमत होकर कथित खरीद-फरोख्त को अवैध और निरस्त बताते हुए भवन तत्काल खाली कराने का निर्णय लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासकीय संपत्ति की इस तरह खरीद-बिक्री होती रही तो पंचायत की संपत्तियां भी सुरक्षित नहीं रहेंगी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत क्षेत्र में लंबे समय से शासकीय जमीनों की अवैध खरीद-बिक्री हो रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। इस मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इधर, ग्राम पंचायत की सरपंच गोमती श्याम मांझी ने स्वीकार किया कि पूर्व में कुछ कारणों से वे पंचायत के कार्यों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हो पा रही थीं। उन्होंने कहा कि उनसे गलती हुई है और अब वे नियमित रूप से पंचायत भवन में बैठकर कार्य करेंगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पंचायत भवन वास्तव में शासकीय संपत्ति है, तो उसका सौदा किस अधिकार से किया गया..? क्या इस मामले में संबंधित जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य विवादों की तरह फाइलों में दब जाएगा..?