गांव के दौरे पर ‘गाड़ा भैंसा’ देख भावुक हुईं जनपद उपाध्यक्ष हुलसी
पृथक छत्तीसगढ़/महासमुंद।
आधुनिकता और मशीनी युग की अंधी दौड़ में जहां आज चमचमाती गाड़ियां, बढ़ता प्रदूषण और रफ्तार का बोलबाला है, वहीं अपने जनपद क्षेत्र के ग्रामीण अंचल के दौरे पर निकलीं महासमुन्द जनपद उपाध्यक्ष हुलसी जी को विलुप्त होती हमारी प्राचीन ग्रामीण संस्कृति की एक बेहद खूबसूरत, जीवंत और भावुक कर देने वाली झलक देखने को मिली, जब उनका सामना ग्रामीण परिवेश के पारंपरिक परिवहन साधन ‘गाड़ा भैंसा’ (भैंसा गाड़ी) से हुआ। एक समय था जब यही भैंसा गाड़ी ग्रामीण जीवन में आवागमन, खेती-किसानी और माल ढुलाई का सबसे प्रमुख और भरोसेमंद साधन हुआ करती थी, जो बिना किसी महंगे ईंधन के और बिना पर्यावरण को रत्ती भर भी प्रदूषित किए, इंसान और प्रकृति के बीच गहरे सामंजस्य का एक मूक संदेश देती थी, लेकिन आज के इस आधुनिक दौर में यह दृश्य पूरी तरह दुर्लभ होता जा रहा है। इस अनूठी और विलुप्तप्राय झलक को देखकर जनपद उपाध्यक्ष हुलसी जी न सिर्फ भावुक हो उठीं, बल्कि उन्होंने इसे हमारी लोक संस्कृति, समृद्ध परंपरा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता की याद दिलाने वाली एक अमूल्य धरोहर बताया और क्षेत्रवासियों सहित नई पीढ़ी से यह अपील की कि हमें विकास की राह पर आगे बढ़ने के साथ-साथ अपनी मिट्टी की खुशबू, प्राचीन सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के प्रति अपनी इस जिम्मेदारी को सहेजने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए, ताकि हमारी यह अनमोल विरासत हमेशा जीवित रह सके।