शासन के नियमों को ताक में रखकर एक ही व्यक्ति ने ली दोहरी अनुकंपा नियुक्ति का लाभ
शेख मुबारक@पृथक छत्तीसगढ़/सक्ती।
सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों की दुहाई देने वाले अधिकारी खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक ही व्यक्ति को दो बार अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया गया है, वह भी अलग-अलग पदों पर। शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, विभागीय मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, सबसे पहले उक्त व्यक्ती को भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। यह नियुक्ति जिला शिक्षा अधिकारी, जांजगीर-चांपा के कार्यालय से सितंबर 2015 में जारी हुई। वहीं हैरान करने वाली बात यह है कि करीब तीन माह बाद उसी व्यक्ति को दिसंबर 2015 में सहायक ग्रेड-03 के पद पर भी अनुकंपा नियुक्ति दे दी गई। यानी एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग पदों पर, दो-दो बार अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया गया, जो कि शासन के नियमों का घोर उल्लंघन है।
जानकारी के अनुसार, शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर उल्लेख है कि किसी मृत शासकीय सेवक के परिजन को केवल एक बार अनुकंपा नियुक्ति का लाभ दिया जा सकता है। परंतु इस प्रकरण में विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से दोहरे लाभ का रास्ता खोला गया, जिससे यह पूरा मामला संदिग्ध और भ्रष्टाचार की बू देने वाला प्रतीत होता है।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी में इस बात का खुलासा हुआ है, कि एक ही व्यक्ति को दो बार सितंबर 2015 और दिसंबर 2015 में वो भी लगभग तीन माह के बाद पुनः अनुकंपा नियुक्ति देकर फर्जीवाडें को अंजाम दिया गया। वही जिम्मेदारों ने इस को अंजाम देने गजब का खेल खेला है, सूचना का अधिकार में प्राप्त दस्जावों में विभाग ने स्वयं स्वीकार किया है कि सितंबर 2015 में उक्त व्यक्ति को भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। और उन्होने बकायदा ज्वाईन भी किया है। वहीं साक्ष्य छुपाने भृत्य पद पर नियुक्ति से जुड़े मूल दस्तावेज़ जिला कलेक्टर कार्यालय में जमा हैं, वही जिस रजिस्टर में पदभार ग्रहण करने उल्लेख है उसकी छायाप्रति उपलब्ध कराया गया है। वही दिसंबर 2015 में ग्रेड 03 की अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित समस्त दस्तावेज उपलब्ध है, यानी रिकॉर्ड छिपाने और गड़बड़ी पर पर्दा डालने की कोशिश साफ झलकती है।
स्थानीय पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने इस मामले को गंभीर भ्रष्टाचार का उदाहरण बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग करने लिखित शिकायत की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के फर्जी अनुकंपा नियुक्तियों से न सिर्फ सरकारी तंत्र की साख पर सवाल उठता है, बल्कि उन सैकड़ों पात्र आश्रितों के अधिकारों का भी हनन होता है, जो वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं। इस मामले में अब और जिला कलेक्टर, लोक शिक्षण संचालनालय को जल्द ही शिकायत की जाने की तैयारी की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने दस्तावेजों के साथ स्पष्ट रूप से बताया है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर भृत्य और ग्रेड-3 दोनों पदों के आदेश मौजूद हैं, जो शासन के आदेशों के पूर्ण विपरीत है। शिकायत के बाद अगर उक्त मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो यह शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ा “अनुकंपा घोटाला” साबित हो सकता है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या अधिकारी जानबूझकर ऐसे फर्जीवाड़ों को संरक्षण देते है, या फिर सिस्टम में ही ऐसी खामियां हैं जो भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही हैं..?
अब सवाल यह उठता है कि –
- आखिर एक ही व्यक्ति को दो अलग-अलग पदों पर अनुकंपा नियुक्ति कैसे दी गई..?
- क्या अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया में उच्च अधिकारियों की मिलीभगत रही, और रूपयों का लेनदेन हुआ..?
- और अगर ऐसा हुआ, तो शासन को हुई आर्थिक क्षति की जिम्मेदारी कौन लेगा..?





