पृथक छत्तीसगढ़/महासमुंद।
जीवन बचाने के लिए न किसी रिश्ता चाहिए, न पहचान — बस इंसानियत का जज़्बा चाहिए। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है सरायपाली थाने में पदस्थ आरक्षक अमित बंजारे ने। दरअसल, मोहिन्द्र सुबोझ उरांव, उम्र 29 वर्ष, निवासी एनटीपीसी सीपत (बिलासपुर) मूल निवासी छोटे साजापाली (सरायपाली, जिला महासमुंद) का सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद अत्यंत दुर्लभ ब्लड ग्रुप HH (Bombay Phenotype/OH Blood Group) की तत्काल आवश्यकता पड़ी। यह ब्लड ग्रुप इतना रेयर है कि 10,000 भारतीयों में केवल एक व्यक्ति में पाया जाता है।

मरीज़ के पिता ने जब रक्तदान सेवा समिति छत्तीसगढ़ से मदद की गुहार लगाई, तो समिति ने तुरंत खोजबीन शुरू की। पता चला कि महासमुंद जिले में इसी रेयर ब्लड ग्रुप के धारक एकमात्र व्यक्ति हैं — आरक्षक अमित बंजारे। ड्यूटी की नाइट शिफ्ट पूरी करने के बाद बिना विश्राम किए अमित बंजारे ने मानवता को सर्वोपरि मानते हुए बिलासपुर के अपोलो अस्पताल पहुँचकर रक्तदान किया और मोहिन्द्र की जान बचा ली। यह घटना इस बात का जीवंत उदाहरण है कि पुलिस केवल अनुशासन और सख्ती का प्रतीक नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सेवा भावना का चेहरा भी है। कठिन ड्यूटी और तनावपूर्ण जीवन के बावजूद आरक्षक अमित बंजारे जैसे अधिकारी अपने कर्मों से यह साबित करते हैं कि वर्दी के भीतर एक इंसान धड़कता है — जो समाज के लिए, जीवन के लिए समर्पित है। रक्तदान सेवा समिति छत्तीसगढ़ ने आरक्षक अमित बंजारे के इस अद्भुत मानवता भरे कार्य के लिए आभार व्यक्त किया है और कहा कि
“ऐसे परोपकारी जवान न सिर्फ समाज की सुरक्षा का बीड़ा उठाए हुए हैं, बल्कि मानवता की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। अमित बंजारे को समिति हृदय से सलाम करती है।”




