शासकीय जमीन पर अवैध राखड़ डंपिंग, सरपंच ने खुद दी एनओसी, गांव को संकट में डाला
अनिल चंद्रा – पृथक छत्तीसगढ़/जैजैपुर।
सक्ती जिले के जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नंदेली में शासकीय भूमि पर राखड़ डंपिंग का खुला खेल जारी है। गांव के सरपंच द्वारा कथित तौर पर एनओसी जारी कर राखड़ माफियाओं को शासकीय ज़मीन पर कब्जा जमाने की खुली छूट दे दी गई है। इस फैसले ने पूरे गांव को संकट में डाल दिया है।
मुखिया बना मिलीभगत का मुखौटा..?
जिस जनप्रतिनिधि को ग्रामीणों ने अपना संरक्षक चुना, वही अब अवैध गतिविधियों का संरक्षणकर्ता बन बैठा है। ग्रामीणों की माने तो सरपंच द्वारा राखड़ माफियाओं को मौखिक और लिखित सहमति देकर शासकीय भूमि को प्रदूषण और अव्यवस्था के हवाले कर दिया गया है।

राखड़ माफियाओं के आगे प्रशासन बेबस, अधिकारी मौन..?
जहां एक ओर ग्रामीण प्रदूषण, जलभराव और खस्ताहाल सड़क से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर माफियाओं की हिम्मत दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। ग्राम पंचायत नंदेली की शासकीय ज़मीन पर रोजाना दर्जनों भारी वाहनो में 40-50 टन तक राखड़ लाकर डंप कर रहे हैं – जबकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी उस सड़क की अधिकतम वहन क्षमता मात्र 15 टन है। उसी सड़क से प्रतिदिन स्कूली बच्चों का आवागमन होता है, जिससे किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
प्रशासन की नज़र या नजरअंदाज़..?
राखड़ डंपिंग का यह पूरा खेल जैजैपुर तहसील कार्यालय से चंद किलोमीटर की दूरी पर खुलेआम चल रहा है। सवाल यह उठता है कि प्रशासनिक अफसरों की नजर इस ओर क्यों नहीं जा रही? या फिर सब कुछ ‘प्रबन्धित’ है?
क्या पैसा और राजनीतिक पहुंच के आगे दम तोड़ रही है प्रशासनिक सख्ती..?
ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है। वे अब पूछने लगे हैं कि क्या शासकीय भूमि अब निजी माफियाओं के हवाले कर दी जाएगी? और क्या जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य अब केवल निजी स्वार्थ की पूर्ति बनकर रह गया है?
- सरपंच प्रतिनिधि का तर्क, सवालों के घेरे में..
जब सरपंच प्रतिनिधि मनहरण साहू से बात की गई, तो उन्होंने कहा – “गांव के विकास के लिए ही राखड़ डंप कराया जा रहा है। बाद में उस स्थान पर हरे-भरे और फलदार वृक्ष लगाए जाएंगे।”
लेकिन सवाल यह है कि – क्या विकास की कीमत ग्रामीणों की सुरक्षा और पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ कर चुकाई जाएगी..?




