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डभरा में फर्जी रजिस्ट्री का खुला खेल, बुजुर्ग महिला की हड़प ली ज़मीन

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अपनी ही ज़मीन की हक़दार बुज़ुर्ग महिला भटकने पर हुई मजबूर

शेख मुबारक
पृथक छत्तीसगढ़/सक्ती।
छत्तीसगढ़ के सक्ती ज़िले के डभरा तहसील से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ न्याय व्यवस्था बल्कि रजिस्ट्री और राजस्व कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। 70 वर्षीय श्रीमती सजीला बाई, जो ग्राम बड़े खैरा (थाना सारंगढ़) की निवासी हैं, जबकी मायका डभरा तहसील क्षेत्र के ठनगन है वह आज अपनी पैतृक निजी ज़मीन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। क्योंकि उनकी ज़मीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर किसी और के नाम रजिस्ट्री कर दिया गया है।

 

फर्जीवाड़े की पूरी पटकथा, पीड़िता सजीला बाई का दर्द

श्रीमती सजीला बाई ने थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि उनकी ग्राम ठनगन स्थित कुल 18 रकबा यानी लगभग 4.581 हेक्टेयर भूमि जो प्रमेन्द्र कुमार पिता धनचंद, देवश्री पिता धनचंद एवं स्वयं सजीला बाई पत्नी कार्तिकराम के नाम पर बी1 एवं ऋण पुस्तिका में दर्ज है। जिसका तीन हिस्से में बटवारा करने तहसील कार्यालय डभरा में आवेदन लगाया तब उन्हे पता चला कि उनके जमीन खसरा नंबर 980/1 में से 0.324 हेक्टेयर जमीन को बिना उनकी जानकारी और सहमति के, फर्जी हस्ताक्षर और कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर बेचा गया। 31 मार्च 2015 को खरीददार कमल किशोर अग्रवाल पिता संतोष कुमार अग्रवाल निवासी किरारी के पास बेचने वालों में प्रमेन्द्र कुमार मौवार, मीना बाई मौवार और कमला बाई के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने रजिस्ट्री कार्यालय में खुद को वारिस दिखाकर रजिस्ट्री करवा दी। पीड़िता का आरोप है कि फर्जी फोटो लगाकर और जाली पहचान-पत्रों के आधार पर यह खेल खेला गया, और रजिस्ट्री पूरी कर दी गई।

 

 

प्रशासन की भूमिका संदिग्ध…?

सवाल यह उठता है कि जब असली ज़मीन मालिक मौजूद है, तो रजिस्ट्री कार्यालय ने बिना सत्यापन किए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कैसे कर दी..? क्या जमीन दलाल, तहसील, पटवारी और रजिस्ट्री विभाग की लापरवाही या मिलीभगत के बिना यह संभव था..? पीड़िता श्रीमती सजीला बाई ने खुद की ज़मीन को लेकर थाना प्रभारी डभरा को एफआईआर दर्ज करने शिकायत पत्र सौंपी है। पीड़िता श्रीमती सजीला बाई का आरोप है कि जिन्होंने फर्जीवाड़ा किया, वो खुलेआम घूम रहे हैं और वह स्वयं थाना सहित अन्य दफ्तरों के चक्कर लगा रही है।

 

 

कागज़ों में खेल, ज़मीनी हक छीन लिया गया

यह मामला सिर्फ एक महिला की ज़मीन पर फर्जीवाड़े का नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह है। जब तक इस तरह की घटनाओं पर सख्त कार्यवाही नहीं होती, भू-माफिया गरीब, महिला और बुजुर्गों के हक़ छीनते रहेंगे।

 

मांग और कार्रवाई की अपील

पीड़िता श्रीमती सजीला बाई ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर एफआईआर, रजिस्ट्री निरस्त करने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। उन्होंने 10 प्रतियों में रिपोर्ट और दस्तावेज़ सौंपते हुए डभरा थाने से न्याय की गुहार लगाई है।