Home छत्तीसगढ़ लोहराकोट में ‘बोर खनन’ के नाम पर 10 लाख का खेल..?

लोहराकोट में ‘बोर खनन’ के नाम पर 10 लाख का खेल..?

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सरपंच-सचिव पर फर्जी बिल लगाकर शासकीय राशि आहरण का आरोप,
कलेक्टर से जांच की मांग

शेख मुबारक @ पृथक छत्तीसगढ़/जैजैपुर।

सक्ती जिले के जनपद पंचायत जैजैपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत लोहराकोट में बोर खनन के नाम पर शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने पंचायत पदाधिकारियों पर फर्जी बिल लगाकर करीब 10 लाख रुपये की राशि आहरित करने का गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर से जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत आवेदन के अनुसार, ग्राम पंचायत लोहराकोट में युवाओं की मांग पर क्रिकेट खेल मैदान, सहित ग्रामीणों की मांग पर भाठापारा छुरड़ा तालाब के पास, फिरन सिदार घर, सुखीन सिदार घर के पास तथा सतनामी मोहल्ला धरसा में कुल पांच नग निःशुल्क बोर खनन कराया गया था। ग्राम पंचायत में सरपंच सचिव ने 5 नए बोर खनन के लिए गौण खनिज मद से स्वीकृत करा कर इन्हीं निःशुल्क खनन किए गए बोर को पास करा कर राशि आहरण कर गबन करने की ग्रामीणों ने शिकायत किया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सरपंच एवं सचिव द्वारा उक्त बोर खनन कार्य को दर्शाते हुए पंप लगाने एवं फर्जी बिल प्रस्तुत कर करीब 10 लाख रुपए शासकीय राशि का आहरण किया गया। शिकायत में इसे शासकीय राशि के दुरुपयोग एवं गबन का मामला बताते हुए पूरे प्रकरण की गहन जांच की मांग की गई है।

 कलेक्टर कार्यालय में पहुंची शिकायत

शिकायत आवेदन को कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत किया गया है। आवेदन में ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत की प्रतिलिपि जिला पंचायत सक्ती के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा जनपद पंचायत जैजैपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को भी प्रेषित किए जाने का उल्लेख है।

बोरवेल्स संचालक का दावा,  निःशुल्क किया खनन

ग्राम पंचायत लोहराकोट में पांच नग बोर खनन को लेकर 10 लाख रुपए की शासकीय राशि आहरण पर सवाल उठे हैं। कलेक्टर को दी गई शिकायत में राजेश बोरवेल्स एंड ट्रेडर्स के संचालक ने बताया कि उनके द्वारा पांचों बोर का खनन निःशुल्क किया गया था और इसके लिए पंचायत से किसी राशि की मांग नहीं की गई। शिकायत में आरोप है कि इसके बावजूद पंचायत द्वारा फर्जी बिल लगाकर 10 लाख की राशि आहरित की गई।

अब जांच पर टिकी ग्रामीणों की नजर

ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में सवाल यह है कि क्या वास्तव में पांच बोर खनन और पंप स्थापना पर 10 लाख की राशि खर्च हुई..? या फिर निः शुल्क किए गए बोर खनन को कार्य दिखाकर राशि आहरण किया गया। और यदि बिल फर्जी हैं तो शासकीय राशि का आहरण किस आधार पर हुआ..? इसके लिए कौन कौन जिम्मेदार है, अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी है। मामले में मौके का भौतिक सत्यापन, बिल-वाउचर एवं भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच से ही आरोपों की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।