दो सदस्यीय जांच टीम बनी, तीन माह से अधिक बीते फिर भी जांच प्रतिवेदन क्यों नहीं हुआ जमा..?
कार्रवाई के बजाय फाइलों में अटकी जांच, जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल…
शेख मुबारक @ पृथक छत्तीसगढ़/सक्ती।
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिला मुख्यालय में स्वामी आत्मानंद हिंदी माध्यम स्कूल, कसेरपारा सक्ती में शिक्षकों की जीपीएफ राशि के गबन की शिकायत अब जांच की धीमी रफ्तार में उलझती नजर आ रही है। मामले में शिकायत के बाद दो सदस्यीय जांच टीम गठित की गई, लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच प्रतिवेदन जमा नहीं किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जांच टीम को जांच पूरी करने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कार्रवाई को लेकर गंभीर क्यों नहीं हैं..?
शिकायतकर्ता की ओर से जिला कलेक्टर को दिए गए आवेदन के मुताबिक, 23 अप्रैल 2026 को लिखित शिकायत कर शिक्षकों के जीपीएफ खाते से राशि आहरण एवं गबन की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। शिकायत में पदस्थ/संविदा लिपिक पर नवंबर एवं दिसंबर 2025 की जीपीएफ कटौती की राशि संबंधित खाते में जमा नहीं करने तथा अन्य प्रयोजन में उपयोग किए जाने का मामला सामने आया। शिकायत में इसे शासकीय धनराशि के दुरुपयोग एवं वित्तीय अनियमितता की श्रेणी का मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
दो सदस्यीय जांच टीम बनी, लेकिन जांच प्रतिवेदन कहां..?
मामले की गंभीरता को देखते हुए दो सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया। लेकिन शिकायत को तीन महीने से अधिक समय गुजरने के बावजूद जांच प्रतिवेदन सामने नहीं आया है। इससे जांच की निष्पक्षता और जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर जांच टीम ने अब तक क्या जांच की..? किन दस्तावेजों की जांच हुई..? किस-किस के बयान दर्ज किए गए..? और सबसे बड़ा सवाल—जांच रिपोर्ट अब तक जमा क्यों नहीं हुई..?शिकायत के बावजूद जांच लंबित रहती है तो इससे न केवल असंतोष बढ़ता है, बल्कि विभागीय जांच व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगना स्वाभाविक है।
जांच में देरी, कहीं मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश तो नहीं..?
शिकायतकर्ता ने अब जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग करने की बात कही है। वहीं, तीन माह से अधिक समय से लंबित जांच को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या जांच टीम अपनी जिम्मेदारी निभा रही है या फिर मामला महज कागजी कार्रवाई तक सीमित होकर रह गया है..? अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस लंबित जांच पर कब तक रिपोर्ट तलब करता है और जीपीएफ राशि से जुड़े आरोपों की सच्चाई सामने लाकर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।