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मोबाइल मेडिकल यूनिट कोरबा में स्वास्थ्य सेवाओं का भ्रष्टाचार मॉडल ! फर्जी मरीज, दोहरी ड्यूटी और करोड़ों का खेल

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मोबाइल मेडिकल यूनिट में गरीबों के इलाज की आड़ में करोड़ों की लूट

शेख मुबारक @ पृथक छत्तीसगढ़ / कोरबा।

मुख्यमंत्री शहरी स्लम स्वास्थ्य योजना के तहत संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) का काला चेहरा उजागर हुआ है। पड़ताल में सामने आया कि कंपनी प्रबंधन, अधिकारी और चिकित्सक की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और भ्रष्टाचार चल रहा है।

 

एक डॉक्टर, दो जगह एक समय पर कर रहा इलाज..?

मोबाइल मेडिकल यूनिट 2 के चिकित्सक डॉ. राकेश कुमार जांगड़े पर गंभीर आरोप है कि वे एक ही समय पर शासकीय अस्पताल और मोबाइल मेडिकल यूनिट दोनों जगह सेवाएं दे रहे थे। हमारे मीडिया कर्मियों ने अस्पताल और यूनिट दोनों जगह वीडियो व तस्वीरें जुटाईं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी हैं। यह बड़ा सवाल खड़ा करता है “कोई डॉक्टर एक ही समय पर दो जगह उपस्थिति कैसे दर्ज कर सकता है..?

 

मोबाइल मेडिकल यूनिट पर फर्जी मरीजों का खेल

जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए फर्जी नाम और एंट्री दर्ज की जा रही थी। हम ऐसा इसलिए कह रहे है कि एक ही मोबाइल नंबर से कई मरीज पंजीकृत किए गए। जब उन नंबरों पर कॉल किया गया तो मरीजों ने साफ कहा कि “हमने कभी मोबाइल मेडिकल यूनिट में इलाज नहीं कराया। सूत्रों के मुताबिक, कंपनी प्रबंधन उच्च अधिकारियों के दबाव में कर्मचारी फर्जी आंकड़े गढ़ने को मजबूर हैे, ताकि नगर निगम और सरकारी एजेंसियों से करोड़ों रुपये का भुगतान वसूला जा सके।

 

जिम्मेदारों की मिलीभगत..?

एरिया प्रोजेक्ट मैनेजर नेहा कश्यप कोरबा की मोबाइल मेडिकल यूनिट 02 और 6 की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। बिना उनकी जानकारी के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं माना जा रहा। वहीं रीजनल मैनेजर आशीष जायसवाल पर भी आरोप है कि भर्ती और संचालन में घोर लापरवाही की गई। अब यह जांच का विषय हैं। वहीं सूत्र बताते हैं कि बव्या हेल्थ सर्विसेज कंपनी प्रबंधन की सहमति और सांठगांठ के बिना इतना बड़ा भ्रष्टाचार संभव ही नहीं।

 

जनता के साथ धोखा..?

राज्य सरकार गरीबों और स्लम बस्तियों के लिए करोड़ों खर्च कर रही है। लेकिन कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों की मिलीभगत से योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही है। नतीजा यह कि गरीब मरीजों तक सही स्वास्थ्य सुविधा नहीं पहुंच पा रही।