सक्ती।
खनिज विभाग की ढिलाई और मिलीभगत ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खम्हरिया माइंस मालिक मनीष सिंह बनाफर के माइंस पर चल रहे अवैध खनन की शिकायत पर महीनों गुजर जाने के बाद भी विभागीय अधिकारियों द्वारा कार्रवाई तक नहीं की गई। इससे आक्रोशित शिकायतकर्ता निशीथ तिवारी ने कहा अब सीधे सक्ती कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन देकर उच्चस्तरीय जांच की मांग करने की तैयारी है।
खनन माफियाओं की मौज – शासन को करोड़ों का नुकसान
सूत्रों के मुताबिक, खम्हरिया माइंस में लंबे समय से अवैध खनन माफिया सक्रिय हैं। करोड़ों रुपये का खनिज बिना वैध प्रक्रिया के निकाला जा रहा है, जबकि जिले का खनिज विभाग आंखें मूंदे बैठा है। अनुमान है कि अब तक शासन को राजस्व की करोड़ों रुपये की चपत लग चुकी है, मगर अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
जांच फाइल दबाए बैठे अधिकारी
शिकायतकर्ता निशीथ तिवारी ने बताया कि उन्होंने खनिज अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अधिकारी जांच की फाइल को ठंडे बस्ते में डालकर बैठे हुए हैं। यही कारण है कि उन्होंने अब मजबूरन कलेक्टर के समक्ष जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराने की मजबूरी है, ताकि जिला प्रशासन की ओर से निष्पक्ष जांच हो और खनन माफियाओं पर कार्रवाई की जाए।
बड़े अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल
जनदर्शन में शिकायत होने के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इतनी बड़ी अनियमितताओं पर खनिज विभाग चुप क्यों है? क्या अधिकारी खनन माफियाओं के साथ सांठगांठ कर शासन को नुकसान पहुंचाने में परोक्ष रूप से शामिल हैं..?




