Home क्राइम MMU 03 की सीबीसी मशीन डेढ़ माह से खराब, मरीज बेहाल-सिस्टम खामोश

MMU 03 की सीबीसी मशीन डेढ़ माह से खराब, मरीज बेहाल-सिस्टम खामोश

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ठेकेदार की लापरवाही पर जिम्मेदार मौन, सरकारी पैसे से निजी कंपनी की चांदी

 

शेख मुबारक
पृथक छत्तीसगढ़/सक्ती।

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले की नगर पालिका क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए चलाई जा रही मोबाइल मेडिकल यूनिट योजना अब खुद बीमार होती जा रही है। जिले के जैजैपुर बाराद्वार में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट-03 की सीबीसी जांच मशीन पिछले करीब डेढ़ महीने से खराब है, जिससे ग्रामीणों को खून जांच की अहम सेवा नहीं मिल पा रही। इस मोबाइल मेडिकल यूनिट के भरोसे रोजाना दर्जनों मरीज अपने रक्त की जांच करवाने पहुंचते हैं, लेकिन ठेकेदार और प्रबंधन की लापरवाही के चलते मशीन को अब तक सुधारा नहीं गया है। इसका सीधा असर गरीब और दूर-दराज के मरीजों पर पड़ रहा है, जो अब बाहर प्राइवेट लैब में महंगी जांच करवाने को मजबूर हैं।

 

जिम्मेदारों की लापरवाही ने सेहत की बुनियादी सुविधा तक छीन ली
सीबीसी मशीन से खून में संक्रमण, हीमोग्लोबिन की मात्रा, प्लेटलेट्स और अन्य महत्वपूर्ण सूचनाएं देती है, जो गंभीर बीमारियों की पहचान के लिए जरूरी होती है। लेकिन सक्ती नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी और ठेका कंपनी की संयुक्त लापरवाही के कारण, इस यूनिट में न तो जांच हो रही है और न ही कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

 

शासन को आर्थिक चूना, जनता को जीवन का संकट

सरकार हर साल करोड़ों रुपये इन मोबाइल यूनिट्स के संचालन पर खर्च करती है, लेकिन ग्राउंड पर सेवा शून्य है। खून जांच जैसी बुनियादी सुविधा करीब दो महीनों से ठप है और वही सुत्रों के अनुसार कंपनी को पूरा भुगतान जारी है। यह सीधा शासन को आर्थिक चूना लगाने जैसा मामला है, लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सक्ती नगर पालिका के जिम्मेदार अब तक इस गंभीर लापरवाही पर आंखें मूंदे बैठे हैं।

 

किसकी जिम्मेदारी..? कौन देगा जवाब..?

नगर पालिका क्षेत्रों में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट की संचालन की जिम्मेदारी नगर पालिका के अधिनस्त रहता है। जैजैपुर बाराद्वार में संचालित मोबाइल मेडिकल यूनिट-03 की सीबीसी जांच मशीन पिछले करीब डेढ़ महीने से खराब है, आखिर इस बात पर नगर पालिका सक्ती के जिम्मेदार अधिकारीयों की नजर क्यौ नही गई। या फिर जानकर भी अनजान बने बैठे है। तब सवाल उठता है कि क्या सरकार इन संवेदनशील स्वास्थ्य योजनाओं को यूं ही लुटते देखती रहेगी..? या किसी जिम्मेदार अधिकारी या ठेकेदार पर गिरेगी गाज..? क्या सक्ती में सरकारी योजनाएं कागजों पर चल रही हैं, जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। अगर अब भी सरकार और प्रशासन नहीं जागे, तो मोबाइल यूनिट से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ एक “घोषणा” बन कर रह जाएंगी और बीमार होता रहेगा सिस्टम।

 

अभी तक इस बारे में किसी भी तरह का कोई शिकायत प्राप्त नही हुआ है, जांच कराते है अगर ऐसा है तो कंपनी को नोटिस जारी करेंगें।

प्रहलाद पांडेय CMO सक्ती।