गायब होते युवा : सट्टा सिंडिकेट का अगला चेहरा या अगली कुर्बानी..?
शेख मुबारक
पृथक छत्तीसगढ़/सक्ती।
नगर की शांति के पीछे एक गहरी साजिश दबाई जा रही है — ऐसी साजिश जिसमें दर्जनों युवा लापता हैं, और कोई खोजने वाला नहीं है। इस खोजी पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पिछले कुछ वर्षों में सक्ती और आसपास के इलाकों से कई युवक कथित रूप से सट्टा नेटवर्क में शामिल होकर बाहर भेजे गए, जिनमें से कुछ का अब तक कोई अता-पता नहीं।
कहीं लौटे नहीं…और कहीं तलाश नहीं !
सूत्रों की मानें तो ये युवक नागपुर, गोवा, उड़ीसा और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में डिवाइस ऑपरेटर के रूप में भेजे गए थे। कुछ को दुबई ले जाया गया। लेकिन उनमें से कुछ वापस लौटकर नहीं आए। परिजन अब भी चुप हैं — या तो डर से, या लालच में। वही स्थानीय प्रशासन ने न तो कोई गुमशुदगी दर्ज की, न ही इन पर कभी गंभीर जांच की।
काली दुनिया में ‘गायब’ होना आसान, तलाशना नामुमकिन
इन युवाओं के दस्तावेज, पहचान पत्र और बैंक अकाउंट — सब कुछ पहले से सट्टा रैकेट के पास था। जब वे “लौटने लायक” नहीं बचे, तो बस संपर्क काट दिया गया। कुछ सूत्र दावा करते हैं कि एक-दो मामलों में इन युवाओं को रास्ते से हटाया गया, क्योंकि उन्होंने नेटवर्क में विरोध या जानकारी लीक करने की कोशिश की थी।

‘मास्टरमाइंड’ खुले में, परिजन मौन, प्रशासन चुप
जिन सटोरियों ने इन युवाओं को बाहर भेजा, वे आज नगर में खुलेआम घूम रहे हैं — राजनैतिक संरक्षण, महंगी गाड़ियों और सोशल मीडिया में रीलों के साथ। लेकिन जिन घरों से बेटे गए, वहां सन्नाटा है — न शिकायत, न सवाल।
जिनका नाम बैंक खातों में, वे खुद लापता !
खास बात ये है कि जिन युवाओं के नाम पर सट्टा लेन-देन के बैंक अकाउंट खोले गए, उन्हीं में से कुछ अब लापता हैं। क्या उन्हें मोहरा बनाकर सारा खेल खेला गया..?
गायब युवा, मरे हुए सिस्टम की सबसे बड़ी गवाही हैं !
जब तक परिजन चुप हैं, प्रशासन मौन है — तब तक यह सट्टा नेटवर्क और ज़्यादा मजबूत होता जाएगा।
सवाल है : कितने और युवा ‘लापता’ होंगे, तब जागेगा तंत्र..?




