राजनीति, तकनीक और अपराध का गठजोड़ — युवाओं को डुबो रहा है गोरखधंधा
शेख मुबारक, शकील अहमद की कलम से..
पृथक छत्तीसगढ़ @ सक्ती।
सक्ती नगर में सट्टे का जाल अब केवल जुए और ताश के पत्तों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक सुनियोजित, हाईटेक और अंतरराज्यीय संगठित अपराध का रूप ले चुका है। सट्टे के इस काले कारोबार ने अब न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती दी है, बल्कि बेरोजगार युवाओं के भविष्य को भी अंधकार में धकेल दिया है। नगर में सटोरियों का ऐसा दबदबा है कि वे अब राजनीति और पुलिस तंत्र तक पर प्रभाव डालने लगे हैं। पुलिस भले ही दावा करे कि सक्ती में सट्टे पर नकेल कस दी गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
विदेश तक फैला नेटवर्क, दुबई भेजे गए युवक..?
सूत्रों के अनुसार, सक्ती के कुछ युवाओं को इलेक्ट्रॉनिक सट्टा डिवाइस ऑपरेट करने के लिए दुबई तक भेजा गया था, जहां उन्हें महीने के 30 से 35 हजार रुपये तक वेतन और सुविधाएं दी गईं। लेकिन असंतोषजनक वेतन और विदेशी ज़िंदगी की कठिनाइयों के चलते अधिकांश युवा कुछ ही महीनों में लौट आए।

देश के कई राज्यों में फैला हुआ नेटवर्क
वर्तमान में नगर के दर्जनों युवा नागपुर, गोवा, उड़ीसा और दक्षिण भारत के अन्य हिस्सों में इस अवैध नेटवर्क का हिस्सा बने हुए हैं। सट्टा अब मोबाइल गेमिंग ऐप के जरिए संचालित हो रहा है, जिससे इसकी पकड़ और गहरी होती जा रही है।
राजनीति से सटोरियों की नजदीकी, पुलिस की मजबूरी
नगर में एक जनप्रतिनिधि के करीबी युवक पर भी गंभीर आरोप हैं, जो सट्टे के मामले में जेल नहीं, बल्कि अस्पताल में भर्ती होकर बाहर रहा। अब वह खुलेआम गेमिंग ऐप चला रहा है, और उसके साथ कई अन्य युवा भी इस गोरखधंधे में शामिल हैं। पुलिस इसलिए कार्यवाही करने में हिचक रही है क्योंकि पूरा ऑपरेशन अन्य शहरों और राज्यों से रिमोट तरीके से संचालित हो रहा है।
फर्जी बैंक अकाउंट और ग़ायब युवा..?
खासकर दलित, आदिवासी और गरीब वर्ग के नाम पर निजी बैंकों में करंट अकाउंट खुलवाकर सट्टे का लेन-देन किया जा रहा है। कई युवा, जो इस नेटवर्क का हिस्सा बने, वर्षों से लापता हैं, और शक है कि उन्हें रास्ते से हटा दिया गया है।
बदलती सरकार के साथ बदलते सटोरिए
नगर के सटोरिए बहुत ज़्यादा होशियार हैं, प्रदेश में जिसकी सत्ता या कहें कि जो नेता जितना पावरफुल होगा सभी सटोरिए उसके करीबी बन जाते हैं और अपने आपको सत्र और पावरफुल नेता के करीबी बता कर पुलिस को गुमराह करते रहते हैं और अपने सट्टे को गोरखधंधे को संरक्षण की छत्री में छुपा लेते हैं।

महादेव ऐप से भी बड़ा खेल, लेकिन कार्रवाई नहीं!
प्रदेश में भले ही महादेव सट्टा ऐप को लेकर राजनीतिक भूचाल आया हो, लेकिन सक्ती से संचालित कुछ ऐप उससे भी अधिक प्रभावशाली और खतरनाक हैं। दुर्भाग्य यह है कि इन पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है — शायद इसलिए कि इन सटोरियों की पहुंच सत्ता और सिस्टम की ऊंची कुर्सियों तक है।
युवाओं के लिए सटोरिए बन रहे ‘रोल मॉडल’
नगर में जिस तरह सटोरिए राजशाही ठाट-बाट की जिंदगी जी रहे हैं, उससे युवा वर्ग मोहित हो रहा है। सट्टे की आसान कमाई उन्हें आकर्षित कर रही है, और यही सबसे बड़ा सामाजिक खतरा बनता जा रहा है।
प्रशासनिक आश्वासन बनाम जमीनी हकीकत
भूतपूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वर्तमान गृहमंत्री विजय शर्मा तक से पत्रकारों ने इस मुद्दे पर सवाल किए, पर जवाब सिर्फ आश्वासन का मिला — “जल्द कार्यवाही होगी।” यह “जल्द” कब आएगा, यह अब एक जुमला भर बन गया है।
जब तक केंद्र सरकार गेमिंग ऐप और ऑनलाइन सट्टे पर सख्त कानून नहीं लाती और पुलिस तंत्र को तकनीकी प्रशिक्षण व स्वतंत्रता नहीं मिलती, तब तक यह अवैध कारोबार यूं ही फलता-फूलता रहेगा..?




